- नितिन गडकरीभारतीय राजनीती कावो दूसरा बदसूरत मगर अपरिहार्य चेहरा हैं ,जो कहेता हैं के "आल वील नोट बी वेल "यही दशा रहेगी देश की ...कोई फरक नहीं पड़ेगा .....कोई mass change , कोई बदलाव नहीं होगा ,बस मोहरे बदल जायेगे ....राजकारण और अर्थकारण साथ साथ चलता रहेगा ....बदकिस्मती से गडकरी जैसे लोगो की राजकीय समझ बहुत ही "सिकुची हुवी रही , विशाल देह की तरह बुद्धि नहीं मिली ,
- उनके लिए राजनीती का मतलब खुद का विकास मात्र बन गया ,,,,

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